केंद्र सरकार के नए SIM Binding नियम से 1 मार्च 2026 से WhatsApp, Telegram, Signal समेत सभी मैसेजिंग ऐप्स में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर वाली एक्टिव सिम कार्ड प्राइमरी डिवाइस में मौजूद रहना अनिवार्य हो गया है। सिम निकालने या डीएक्टिवेट होने पर ऐप काम करना बंद कर सकता है, जबकि WhatsApp Web और डेस्कटॉप सेशन हर 6 घंटे में ऑटो लॉगआउट हो जाएंगे। यह बदलाव साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और क्रॉस-बॉर्डर स्कैम रोकने के लिए DoT की Telecom Cyber Security Rules के तहत लागू किया गया है।
सरकार ने आज से लागू किया सख्त SIM Binding नियम, WhatsApp यूजर्स पर बड़ा असर
1 मार्च 2026 से भारत में मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के नियम पूरी तरह बदल गए हैं। Department of Telecommunications (DoT) द्वारा नवंबर 2025 में जारी निर्देश के अनुसार अब WhatsApp सहित Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat जैसे प्रमुख ऐप्स को अनिवार्य रूप से SIM Binding लागू करना पड़ रहा है। इसका सीधा मतलब है कि आपका अकाउंट सिर्फ उसी फोन में चलेगा जिसमें वह सिम कार्ड फिजिकली मौजूद और एक्टिव हो जिससे अकाउंट रजिस्टर्ड किया गया था।
यदि प्राइमरी डिवाइस से सिम कार्ड निकाल दिया जाए या वह डीएक्टिवेट हो जाए तो ऐप तुरंत काम करना बंद कर सकता है या अकाउंट एक्सेस लिमिटेड हो सकता है। यह नियम उन यूजर्स को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा जो बिना सिम वाले सेकेंडरी फोन में WhatsApp चलाते थे, eSIM या वर्चुअल नंबर पर निर्भर थे, या बार-बार सिम बदलते थे।
किन यूजर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
मल्टी-डिवाइस यूजर्स: पहले WhatsApp को एक ही सिम से कई डिवाइस पर लिंक किया जा सकता था, लेकिन अब प्राइमरी फोन में सिम की मौजूदगी जरूरी होगी। लिंक्ड डिवाइस पर मैसेजिंग जारी रह सकती है, लेकिन बेसिक वेरिफिकेशन प्राइमरी सिम से जुड़ा रहेगा।
WhatsApp Web और डेस्कटॉप यूजर्स: अब वेब या डेस्कटॉप सेशन हर 6 घंटे में ऑटोमैटिक लॉगआउट हो जाएंगे। हर बार QR कोड स्कैन या OTP से दोबारा लॉगिन करना पड़ेगा, क्योंकि सिस्टम सिम की एक्टिव प्रेजेंस चेक करेगा।
सेकेंडरी डिवाइस या टैबलेट यूजर्स: बिना सिम वाले टैबलेट, पुराने फोन या Wi-Fi केवल डिवाइस पर WhatsApp अब नहीं चलेगा, क्योंकि सिम बाइंडिंग फेल हो जाएगी।
बार-बार सिम स्वैप करने वाले: सिम बदलने पर अकाउंट ट्रांसफर के लिए नया वेरिफिकेशन जरूरी होगा, अन्यथा ऐप लॉक हो सकता है।
सरकार ने नियम क्यों लागू किया?
DoT का कहना है कि यह कदम Telecom Cyber Security (TCS) Rules, 2024 के संशोधन के तहत उठाया गया है। देश में डिजिटल फ्रॉड, फिशिंग, इन्वेस्टमेंट स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और लोन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी फेक या चुराए हुए नंबरों का इस्तेमाल करके क्रॉस-बॉर्डर स्कैम करते हैं। SIM Binding से हर एक्टिव अकाउंट KYC-वेरिफाइड सिम से जुड़ जाएगा, जिससे अपराधियों को ट्रेस करना आसान हो जाएगा।
यह दुनिया का पहला ऐसा नियम है जहां मैसेजिंग ऐप्स को टेलीकॉम जैसी सख्त बाइंडिंग फॉलो करनी पड़ रही है। कंपनियों को 90 दिनों में कंप्लायंस करना था और 120 दिनों में रिपोर्ट सबमिट करनी थी। सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
यूजर्स को क्या करना चाहिए?
अपने प्राइमरी फोन में हमेशा रजिस्टर्ड सिम एक्टिव और इंसर्टेड रखें।
सिम रिचार्ज समय पर कराएं ताकि वह डीएक्टिवेट न हो।
WhatsApp Web इस्तेमाल करने वाले यूजर्स हर 6 घंटे में लॉगिन तैयार रखें।
यदि सिम बदलना जरूरी हो तो पहले WhatsApp अकाउंट को नए नंबर पर माइग्रेट करें।
सेकेंडरी डिवाइस पर ऐप चलाने के लिए प्राइमरी फोन में सिम रखना जरूरी होगा।
यह नियम सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी TIUE (Telecommunication Identifier User Entity) ऐप्स पर लागू है। यूजर्स को डिजिटल सिक्योरिटी और सुविधा के बीच बैलेंस बनाना होगा।



