आनंद महिंद्रा को याद आई मां की ‘ब्लू बेल’ कार, X पर शेयर किया भावुक किस्सा – क्या आप भी पुराने दिनों को मिस करते हैं?

“महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने हाल ही में X पर अपनी मां की पुरानी स्काई ब्लू प्रीमियर पद्मिनी कार की यादें शेयर कीं, जो 1960 के दशक में फिएट के नाम से जानी जाती थी। उन्होंने बताया कि कार बुक करने के 5 साल बाद मिली थी और इसे ‘ब्लू बेल’ नाम दिया गया था, जो अब भी उनके लिए खास है। यह पोस्ट भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की इवोल्यूशन पर एक थ्रेड का हिस्सा है, जिसमें 6245 लाइक्स और लाखों व्यूज मिल चुके हैं।”

आनंद महिंद्रा का भावुक ट्वीट महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी की पहली यादगार कार之旅 का जिक्र किया। यह कार उनकी मां की थी, जो स्काई ब्लू कलर की प्रीमियर पद्मिनी थी। 1960 के दशक में इसे फिएट के नाम से जाना जाता था। महिंद्रा ने लिखा कि उनकी मां खुद इसे ड्राइव करती थीं और कार बुक करने के पूरे 5 साल बाद मिली थी, क्योंकि उस दौर में कारों की वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हुआ करती थी। उन्होंने कार को ‘ब्लू बेल’ नाम दिया था, और इसी आदत को अपनाते हुए महिंद्रा आज भी अपनी कारों को नाम देते हैं। यह मॉडल और ब्रांड उनके लिए हमेशा स्पेशल रहेगा।

यह पोस्ट एक यूजर अकबर मर्चेंट के ट्वीट पर रिप्लाई था, जिसमें भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की इवोल्यूशन को एक फ्रेम में दिखाया गया था। महिंद्रा का यह शेयर अब वायरल हो चुका है, जिसमें 6245 लाइक्स, 253 रीपोस्ट, 13 कोट्स, 163 रिप्लाई, 292 बुकमार्क और 3.61 लाख व्यूज हो चुके हैं।

पोस्ट की पृष्ठभूमि और संदर्भ यह किस्सा भारतीय ऑटोमोटिव इतिहास की एक झलक देता है। 1960-70 के दशक में भारत में कार खरीदना एक लग्जरी था, और प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड द्वारा बनाई गई पद्मिनी कार इटली की फिएट 1100 डिलाइट पर आधारित थी। उस समय कार बुकिंग पर 2 से 5 साल की वेटिंग आम थी, क्योंकि प्रोडक्शन सीमित था और इंपोर्ट रेस्ट्रिक्शंस सख्त थे। महिंद्रा की मां की कार उस दौर की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दर्शाती है, जहां महिलाओं द्वारा कार ड्राइव करना भी दुर्लभ था। आज के दौर में, जहां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इंस्टेंट डिलीवरी का ट्रेंड है, यह कहानी पुराने दिनों की सादगी और धैर्य को याद दिलाती है।

महिंद्रा ने इस पोस्ट के जरिए न सिर्फ पर्सनल मेमोरी शेयर की, बल्कि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की ग्रोथ को भी हाइलाइट किया। वर्तमान में, महिंद्रा ग्रुप इलेक्ट्रिक और एसयूवी सेगमेंट में लीडिंग है, लेकिन यह किस्सा दिखाता है कि उनके रूट्स क्लासिक कारों से जुड़े हैं।

यूजर्स की प्रतिक्रियाएं और डिस्कशन पोस्ट पर मिली रिप्लाईज में यूजर्स ने अपनी कहानियां शेयर कीं। एक यूजर महेश नारायणन ने लिखा कि भारत में कार सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि फैमिली मेंबर होती है, और वेटिंग पीरियड से लेकर नाम रखने तक की ट्रेडिशन मेमोरीज बनाती है। एक अन्य यूजर वीके ने कहा कि कुछ कारें मेटल और व्हील्स से ज्यादा होती हैं – वे मेमोरीज होती हैं।

कई यूजर्स ने पुरानी कारों की ड्यूरेबिलिटी की तारीफ की, जैसे कि पद्मिनी मॉडल जो आज भी कुछ जगहों पर चल रही हैं। एक रिप्लाई में यूजर ने महिंद्रा से पूछा कि क्या वे ऐसी क्लासिक कारों को रिस्टोर करने का कोई प्रोग्राम लॉन्च करेंगे, जिस पर अभी कोई ऑफिशियल रिस्पॉन्स नहीं आया। कुल मिलाकर, यह थ्रेड 163 रिप्लाईज के साथ एक्टिव डिस्कशन में बदल गया, जहां लोग 1960-80 के दशक की कार कल्चर पर बात कर रहे हैं।

भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की इवोल्यूशन: एक नजर क्वोटेड पोस्ट में दिखाई गई इवोल्यूशन को समझने के लिए यहां कुछ की पॉइंट्स:

1950-60 का दौर : हिंदुस्तान मोटर्स की एम्बेसडर और प्रीमियर की पद्मिनी जैसी कारें मार्केट पर राज करती थीं। इंपोर्ट पर बैन होने से लोकल प्रोडक्शन बढ़ा।

1980-90 : मारुति 800 का आगमन, जो अफोर्डेबल कार का सिंबल बनी। वेटिंग लिस्ट 1-2 साल तक घटी।

2000 के बाद : ग्लोबलाइजेशन से फॉरेन ब्रांड्स जैसे Hyundai, Toyota आए, और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ी।

वर्तमान (2026) : इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बोलबाला, जहां टाटा नेक्सॉन ईवी और महिंद्रा एक्सयूवी400 जैसे मॉडल्स लीड कर रहे हैं। सरकारी पॉलिसी जैसे FAME-III स्कीम से ईवी अडॉप्शन 30% तक पहुंच चुका है।

दौरप्रमुख कार मॉडल्सवेटिंग पीरियडप्रमुख बदलाव
1960-70Fiat/Premier Padmini, Ambassador3-5 सालसीमित प्रोडक्शन, लग्जरी आइटम
1980-90Maruti 800, Fiat Uno6-12 महीनेअफोर्डेबिलिटी बढ़ी, मास मार्केट
2000-10Hyundai Santro, Tata Indica1-3 महीनेफॉरेन इन्वेस्टमेंट, वैरायटी
2020-26Mahindra XUV700, Tata Nexon EV1-4 हफ्तेईवी फोकस, इंस्टेंट डिलीवरी

आनंद महिंद्रा की अन्य भावुक कहानियां महिंद्रा अक्सर X पर पर्सनल स्टोरीज शेयर करते हैं। उदाहरण के तौर पर, 2019 में उन्होंने एक व्यक्ति को KUV 100 NXT गिफ्ट की, जो अपनी मां को स्कूटर पर घुमा रहा था। उस व्यक्ति ने बाद में कार को सोशल सर्विस के लिए डेडिकेट किया। 2020 में महिंद्रा ने इसी कहानी पर अपडेट शेयर किया, जिसमें न्यूज18 की रिपोर्ट का जिक्र था।

2025 में एक वीडियो पर कमेंट करते हुए महिंद्रा ने कहा कि कारें सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन नहीं, बल्कि जॉय देती हैं।他们的 डिजाइनर्स और इंजीनियर्स को हमेशा पैशन से काम करने की सलाह दी। यह किस्सा भी उसी फिलॉसفی को रिफ्लेक्ट करता है।

कार नाम रखने की ट्रेडिशन महिंद्रा की मां से मिली यह आदत आज भी जारी है। महिंद्रा अपनी कारों को नाम देते हैं, जैसे उनकी एक SUV को ‘रॉकी’ कहा जाता है। यह ट्रेडिशन कारों को पर्सनलाइज करती है, और कई भारतीय फैमिलीज में आम है। साइकोलॉजिकल स्टडीज दिखाती हैं कि ऑब्जेक्ट्स को नाम देने से अटैचमेंट बढ़ता है, जो लॉन्ग-टर्म यूज को प्रमोट करता है। आज के दौर में, जहां कारें 5-7 साल में चेंज हो जाती हैं, यह पुरानी वैल्यूज को याद दिलाता है।

इंडियन ऑटो इंडस्ट्री में महिलाओं की भूमिका महिंद्रा की मां का कार ड्राइव करना उस समय दुर्लभ था। 1960 में भारत में महिलाओं के पास कार ओनरशिप सिर्फ 5-10% थी, लेकिन आज 2026 में यह 35% तक पहुंच चुकी है। ब्रांड्स जैसे Mahindra और Tata महिलाओं को टारगेट कर रहे हैं, जैसे Mahindra की ‘Her Drive’ कैम्पेन। यह किस्सा जेंडर इक्वालिटी की प्रोग्रेस को हाइलाइट करता है।

वर्तमान ट्रेंड्स से कनेक्शन पुरानी कारों की यादें आज ईवी ट्रांजिशन में रेलेवेंट हैं। 2026 में, भारत में ईवी सेल्स 20 लाख यूनिट्स तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन क्लासिक कार रिस्टोरेशन का मार्केट भी ग्रो कर रहा है। कंपनियां जैसे Premier Automobiles अब हेरिटेज मॉडल्स को रीइश्यू करने पर फोकस कर रही हैं। महिंद्रा का पोस्ट ऐसे ट्रेंड्स को इंस्पायर कर सकता है।

Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और किसी भी स्रोत का उल्लेख नहीं करता। यह समाचार रिपोर्ट है, जिसमें टिप्स या सलाह शामिल नहीं हैं।

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